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Spotify को टक्कर! YouTube Music लाया AI होस्ट्स, सुनाएगा गानों की कहानियां

YouTube Music ने एक ऐसा फीचर टेस्ट करना शुरू किया है जिसमें AI होस्ट्स आपके गानों के साथ जुड़ी कहानियां..

म्यूजिक स्ट्रीमिंग की दुनिया में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एंट्री और मज़ेदार हो गई है. YouTube Music ने शुक्रवार को ऐलान किया कि वह AI म्यूजिक होस्ट्स टेस्ट कर रहा है, जो गानों के बीच आपको ट्रिविया, कहानियां और मजेदार कमेंट्री सुनाएंगे. यह कदम उस समय आया है जब Spotify ने दो साल पहले अपना AI DJ लॉन्च किया था. YouTube का यह नया फीचर फिलहाल YouTube Labs के जरिए लिमिटेड यूज़र्स के लिए उपलब्ध है.

नया फीचर
YouTube Music ने एक ऐसा फीचर टेस्ट करना शुरू किया है जिसमें AI होस्ट्स आपके गानों के साथ जुड़ी कहानियां, आर्टिस्ट की जानकारी और फैन ट्रिविया शेयर करेंगे. यानी गाने सिर्फ सुनने तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनके पीछे की दिलचस्प बातें भी आपके साथ जुड़ेंगी.

यह कॉन्सेप्ट Spotify के AI DJ से मिलता-जुलता है, जो यूज़र्स के लिए क्यूरेटेड म्यूजिक प्लेलिस्ट और आर्टिफिशियल कमेंट्री उपलब्ध कराता है. फर्क इतना है कि YouTube Music इसे अपने YouTube Labs प्लेटफॉर्म के जरिए टेस्ट कर रहा है.

YouTube Labs क्या है
YouTube Labs एक नया AI एक्सपेरिमेंटल हब है, जिसे गूगल के Google Labs की तरह डिजाइन किया गया है. यहां यूज़र्स शुरुआती चरण के AI फीचर्स को ट्राई कर सकते हैं और कंपनी को फीडबैक दे सकते हैं.
इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें साइन अप करने के लिए YouTube Premium मेंबरशिप की जरूरत नहीं है. हालांकि, शुरुआती दौर में यह फीचर केवल अमेरिका में सीमित संख्या में प्रतिभागियों के लिए उपलब्ध कराया गया है.

पहले भी हुए हैं AI एक्सपेरिमेंट
YouTube पिछले कुछ महीनों से लगातार AI फीचर्स पेश कर रहा है.जुलाई 2025 में कंपनी ने AI Conversational Radio लॉन्च किया था, जिसमें यूज़र अपनी पसंद बताकर कस्टम रेडियो स्टेशन बना सकते थे.
हाल ही में, YouTube ने GenAI टूल्स जारी किए, जिनसे क्रिएटर्स शॉर्ट्स बनाने में आसानी पा रहे हैं.YouTube ने AI-पावर्ड सर्च रिजल्ट्स भी लॉन्च किए, जो गूगल के AI Overviews जैसे हैं, साथ ही वीडियो समरी और कंटेंट रिकमेंडेशन भी दिए जा रहे हैं.

फेक AI कंटेंट पर सख्ती
जहां YouTube नए AI फीचर्स को बढ़ावा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर उसने हाल ही में अपनी पॉलिसीज़ अपडेट कर दी हैं. अब क्रिएटर्स “इनऑथेंटिक” कंटेंट जैसे मास-प्रोड्यूस्ड या रिपीटिव वीडियो से कमाई नहीं कर पाएंगे. कंपनी चाहती है कि प्लेटफॉर्म पर AI का इस्तेमाल सिर्फ इनोवेटिव और वैल्यू एड करने वाले कामों के लिए हो.

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